पंचकूला। हरियाणा के रतिया में वर्ष 2021 में सामने आए चर्चित जमीन घोटाले मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पंचकूला के एक परिवार के साथ कथित धोखाधड़ी और जमीन खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी के मामले में तत्कालीन पटवारी मदन लाल को अदालत ने दो साल की सजा सुनाई है। यह मामला उस समय काफी चर्चाओं में रहा था, जब रतिया के तत्कालीन एसडीएम, उनकी पत्नी समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश का केस दर्ज हुआ था।
बताया जाता है कि पंचकूला का एक परिवार जमीन में निवेश कर अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहता था, लेकिन कथित तौर पर जमीन सौदे में हुई गड़बड़ी के चलते परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। परिवार आज भी पंचकूला के एक फ्लैट में रहने को मजबूर है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 में स्टेट ब्यूरो विजिलेंस हिसार ने एक इंस्पेक्टर की शिकायत के आधार पर रतिया के तत्कालीन एसडीएम भरत भूषण कौशिक, उनकी पत्नी सारिका, बर्खास्त पुलिसकर्मी बाला सिंह, उसकी पत्नी करमजीत कौर और तत्कालीन पटवारी मदन लाल के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था।
आरोप था कि तत्कालीन एसडीएम भरत भूषण कौशिक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी और पूर्व पुलिसकर्मी की पत्नी के नाम पर 29 अक्टूबर 2021 को रतिया में 5 कनाल 16 मरले जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी। यह जमीन एक कॉटन फैक्ट्री की बताई गई थी, जिसे जमाबंदी और फर्द में गैर मुमकिन तथा कारखाना दर्ज किया गया था। आरोप है कि जमीन का कोड बदलकर उसे कृषि भूमि दिखाया गया और करीब 45 लाख रुपये में उसकी रजिस्ट्री करवा ली गई।
मामले में यह भी आरोप लगे कि रजिस्ट्री के दौरान नगर पालिका से न तो प्रॉपर्टी आईडी बनवाई गई और न ही जरूरी एनओसी ली गई। रजिस्ट्री कांता देवी नामक महिला के जरिए करवाई गई थी, जबकि पंचकूला निवासी अमृतपाल ने इस जमीन पर अपना दावा जताया था।
शिकायत सामने आने के बाद संबंधित रजिस्टर को इंपाउंड कर दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए हिसार विजिलेंस टीम ने जांच शुरू की और पूरे प्रकरण में केस दर्ज किया गया। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड भी खंगाले गए थे।
अब इस मामले में फतेहाबाद के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज की अदालत ने सुनवाई करते हुए पटवारी मदन लाल को दोषी करार दिया और उसे दो साल की सजा सुनाई है। मामले में अन्य आरोपियों को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।