चंडीगढ़, Idam Today News। हेलो माजरा के वार्ड नंबर-20 स्थित संपर्क केंद्र में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र, क्रैच और डिस्पेंसरी के बाहर लंबे समय से गंदा पानी जमा होने की समस्या सामने आई है। जलभराव के कारण यहां आने वाले छोटे-छोटे बच्चों और बच्चियों के साथ-साथ इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों को समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, संपर्क केंद्र परिसर के आसपास जमा गंदे पानी से दुर्गंध फैल रही है। वहीं पानी लंबे समय तक जमा रहने के कारण मच्छरों के पनपने की आशंका भी बनी हुई है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। लोगों को डर है कि यदि समय रहते जलभराव को दूर नहीं किया गया तो यहां डेंगू, मलेरिया सहित मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

मासूम बच्चों और मरीजों को गंदे पानी के बीच से गुजरने की मजबूरी

सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इसी परिसर में आंगनबाड़ी और क्रैच का संचालन हो रहा है, जहां रोजाना छोटे बच्चे पहुंचते हैं। इसके अलावा डिस्पेंसरी में उपचार के लिए मरीज भी आते-जाते हैं। गंदे पानी के बीच से गुजरने के कारण बच्चों और मरीजों को संक्रमण एवं फिसलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

सोशल वर्कर अरविंद सिंह ने इस मामले को उठाते हुए मौके की तस्वीरें जारी की हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन को समस्या के संबंध में कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रशासन स्वच्छता और मच्छरों की रोकथाम को लेकर आम लोगों के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो सरकारी संस्थानों के आसपास इस तरह गंदा पानी जमा रहने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

‘आम जनता का चालान, सरकारी परिसर की लापरवाही पर कौन जिम्मेदार?’

अरविंद सिंह ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी आम नागरिक की पानी की टंकी का ढक्कन खुला मिलता है तो चालान करने में प्रशासन तत्परता दिखाता है। लेकिन जहां एक ही परिसर में मासूम बच्चे, आंगनबाड़ी कर्मचारी और मरीज नियमित रूप से आते हैं, वहां गंदा पानी जमा होने की स्थिति में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

उन्होंने कहा कि नियम और स्वास्थ्य संबंधी मानक केवल आम जनता पर लागू नहीं होने चाहिए। सरकारी कार्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, क्रैच, डिस्पेंसरी और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में भी साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुरक्षा के नियमों का उतनी ही गंभीरता से पालन होना चाहिए। उनका कहना है कि किसी बीमारी के फैलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को बीमारी की संभावित वजहों को पहले ही खत्म करना चाहिए।

फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवा के छिड़काव की मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चंडीगढ़ प्रशासन एवं नगर निगम से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजा जाए। जलभराव वाले स्थान से तत्काल गंदा पानी निकालने के साथ-साथ पूरे परिसर की सफाई करवाने की मांग की गई है।

इसके अलावा मच्छरों की रोकथाम के लिए फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव करवाने तथा पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग भी की गई है। लोगों का कहना है कि केवल जमा पानी को एक बार निकाल देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि पानी जमा क्यों हो रहा है और भविष्य में दोबारा जलभराव न हो, इसके लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जा सकती है।

अरविंद सिंह ने प्रशासन से इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि मासूम बच्चों और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण इसे केवल सफाई की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

अब सवाल यह है कि आम नागरिकों के घरों में पानी जमा होने या टंकी का ढक्कन खुला मिलने पर कार्रवाई करने वाला नगर निगम सरकारी परिसर में जमा गंदे पानी की समस्या को लेकर कब कार्रवाई करेगा? स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन बीमारी फैलने का इंतजार करने के बजाय तत्काल मौके का निरीक्षण करवाकर समस्या का समाधान करेगा।

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