पंचकूला। जन जागरूकता के लिए विशेषज्ञों ने कहा है कि लंबे समय तक पेट फूलना, पेट में बेचैनी या अन्य लगातार बनी रहने वाली पेट संबंधी समस्याओं को सामान्य गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही विशेषज्ञ से सलाह लेने से गंभीर बीमारियों की पहचान जल्द हो सकती है। पारस हेल्थ पंचकूला में पेरिटोनियम तक फैल चुके एडवांस्ड ओवेरियन कैंसर से पीड़ित 57 वर्षीय महिला का कीमोथेरेपी, सर्जरी और एचआईपीईसी की संयुक्त उपचार प्रक्रिया से सफल इलाज किया गया।

मरीज को लंबे समय से पेट फूलने और बेचैनी की शिकायत थी। शुरुआत में इन लक्षणों को सामान्य पेट की समस्या माना गया, जिसके कारण बीमारी की पहचान में देरी हुई। बाद में पारस हेल्थ के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ईशान अल्लाहाबादी की देखरेख में सीटी स्कैन, कैंसर मार्कर और अन्य जांच की गईं। लैप्रोस्कोपिक बायोप्सी से एडवांस्ड ओवेरियन कैंसर की पुष्टि हुई, जो पेरिटोनियम तक फैल चुका था।

बीमारी की स्थिति को देखते हुए पहले नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी के तीन चक्र दिए गए। इसके बाद लगभग सात घंटे चली साइटो-रिडक्टिव सर्जरी में पेट के अंदर दिखाई देने वाले ट्यूमर को हटाया गया। इसके बाद एचआईपीईसी के तहत पेट के अंदर गर्म कीमोथेरेपी दी गई, ताकि बचे हुए सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित किया जा सके।

सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया। दूसरे दिन उन्हें आईसीयू से बाहर लाया गया और 24 घंटे के भीतर मुंह से भोजन शुरू कर दिया गया। बाद की जांच में उनकी स्थिति अच्छी पाई गई और अब वह सामान्य दैनिक गतिविधियां कर रही हैं।

डॉ. ईशान अल्लाहाबादी ने कहा कि लगातार बने रहने वाले पेट फूलने और बेचैनी जैसे लक्षणों की समय पर जांच जरूरी है। सही मरीजों में कीमोथेरेपी के बाद साइटो-रिडक्टिव सर्जरी और एचआईपीईसी उपचार का विकल्प हो सकता है। पारस हेल्थ पंचकूला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि अस्पताल का प्रयास कैंसर के जटिल मामलों के लिए विशेषज्ञता और बेहतर समन्वय के साथ उन्नत उपचार उपलब्ध

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