पंचकूला, अमर शर्मा । भाजपा के प्रदेश मुख्यालय पंचकमल में आयोजित बुद्धिजीवी संवाद सम्मेलन में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर सियासी घमासान देखने को मिला। पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए एसआईआर प्रक्रिया को गलत ठहराने के उनके प्रयासों को संविधान विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने और मतदाता सूची को दुरुस्त रखने के लिए ही संविधान में एसआईआर का प्रावधान किया गया है।
कंवर पाल गुर्जर ने वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया को अब तक की सबसे बेहतर और पारदर्शी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि आज देश का कोई भी नागरिक डिजिटल माध्यम से मतदाता सूची में अपनी जानकारी प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है और विपक्ष को इस प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय सहयोग करना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मुख्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मनमाने तरीके से होती थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए गठित तीन सदस्यीय चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया है।
राहुल गांधी पर हार की हताशा निकालने का आरोप
कंवर पाल गुर्जर ने कहा कि आज भारत के लोकतंत्र की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है, लेकिन देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी हार की हताशा और राजनीतिक नाकामी छिपाने के लिए लोकतंत्र को बदनाम करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भारत की वैश्विक स्तर पर हो रही प्रशंसा हजम नहीं हो रही।
एंटी-इनकंबेंसी के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और नागालैंड जैसे राज्यों में पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है। ऐसे में कांग्रेस को इन राज्यों में एंटी-इनकंबेंसी क्यों नजर नहीं आती?
एसआईआर के विरोध को बताया अराजकता को बढ़ावा
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ 300 से अधिक लोगों के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और अपनी टीम के साथ राष्ट्रपति से भी मुलाकात की, लेकिन वे कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीति और उसके रवैये पर सवाल खड़े करने वाला बताया।
दिल्ली में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के धरना-प्रदर्शन पर भी उन्होंने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाना और पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर कुठाराघात है।
वोट कटने की शिकायत पर विपक्ष को घेरा
कंवर पाल गुर्जर ने चुटकी लेते हुए कहा कि वोट कटने का मुद्दा केवल विपक्षी पार्टियां उठा रही हैं, जबकि अभी तक कोई नागरिक अपनी वोट कटने की शिकायत लेकर सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए निर्धारित 11 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो चुनाव आयोग के सामने भी प्रक्रिया को लेकर सीमाएं होती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट किया है कि एसआईआर को लेकर लिए गए निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।
इस दौरान उन्होंने वामपंथी नेत्री नेहा बोरा द्वारा बांग्लादेश में उपद्रव का समर्थन करने संबंधी कथित बयान की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे अराजकतावादी सोच का परिणाम बताया।
बुद्धिजीवी समाज के सजग प्रहरी : अजय मित्तल
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष अजय मित्तल ने कहा कि बुद्धिजीवी वर्ग समाज के सजग प्रहरी की भूमिका निभाता है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल आर्थिक संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी बौद्धिक शक्ति, वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक चेतना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि विचारकों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, लेखकों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अहम है। बुद्धिजीवी संवाद सम्मेलन का उद्देश्य समाज के प्रबुद्ध वर्ग के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना तथा सहिष्णुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाना है।
बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन हुए शामिल
जिला अध्यक्ष अजय मित्तल की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा, कालका विधायक शक्तिरानी शर्मा, सम्मेलन संयोजक भवनजीत सिंह, सह-संयोजक पदम राणा, कपिल गौड़, डॉ. राजेश बिंदल और महामंत्री जय कौशिक सहित अनेक गणमान्य नेता उपस्थित रहे।
सम्मेलन में पंचकूला जिले की दोनों विधानसभाओं से शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, कला, साहित्य, चिकित्सा और खेल जगत से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।