पंचकूला। महिला एवं बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई की अपनी नीति को आगे बढ़ाते हुए पंचकूला पुलिस ने एक और अहम मुकाम हासिल किया है। वर्ष 2024 में थाना कालका में दर्ज 16 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष दुआ ने यह फैसला सुनाते हुए आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा-6 के तहत दोषी ठहराया। इस निर्णय को महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में न्यायालय की संवेदनशीलता और पंचकूला पुलिस की प्रभावी जांच का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
डीसीपी पंचकूला आईपीएस अदिति सिंह ने बताया कि 12 अप्रैल 2024 को थाना कालका में एक महिला ने अपनी 16 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने तत्काल भारतीय दंड संहिता की धारा 365 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। लगातार प्रयासों के बाद 28 मई 2024 को पुलिस ने नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया।
जांच के दौरान पीड़िता के बयान, मेडिकल परीक्षण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा-6 जोड़ी गई। पुलिस ने न्यायालय में धारा 164 सीआरपीसी के तहत पीड़िता के बयान दर्ज करवाए, मेडिकल एवं फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए और स्कूल रिकॉर्ड के माध्यम से पीड़िता की आयु का प्रमाण भी प्रस्तुत किया।
इन्हीं वैज्ञानिक, तकनीकी और तथ्यात्मक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन ने कहा कि महिला एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में हर शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक जांच, ठोस साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाना पंचकूला पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा, उनकी गतिविधियों और ऑनलाइन संपर्कों पर सतर्क निगरानी रखें तथा किसी भी संदिग्ध घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।