पंचकूला। सीनियर सिटीजन काउंसिल, पंचकूला के सभागार में आयोजित मासिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गोष्ठी उत्साह, उमंग और रचनात्मक माहौल के बीच संपन्न हुई। कार्यक्रम में साहित्य, संगीत और हास्य की रंगारंग प्रस्तुतियों ने उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारिणी सदस्य सुनील मिनोचा ने 34 साहित्य प्रेमियों एवं वरिष्ठ सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए की। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि ‘आर्ट एंड लिटरेरी जोन’ का नाम बदलकर अब ‘कला एवं साहित्य मंच’ रखा गया है। इस प्रस्ताव का सभी उपस्थित सदस्यों ने करतल ध्वनि के साथ स्वागत और अनुमोदन किया। इसके बाद कार्यकारिणी सदस्यों ने माँ सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित की तथा सरोज चोपड़ा ने संस्कृत श्लोकों के साथ सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंच संचालन डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ और आभा साहनी ने प्रभावी ढंग से किया।

गोष्ठी में डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ ने अपनी कविता ‘कभी शिखर, कभी पाताल…’ सुनाकर श्रोताओं को जीवन के विभिन्न रंगों से रूबरू कराया। आभा साहनी की मार्मिक कविता ‘अम्मा तेरे जाने से, घर-आँगन सूना लगता है’ ने सभी की आंखें नम कर दीं। सुनील मिनोचा की कविता ‘बचपन का प्यार’ ने माता-पिता के प्रति संवेदनाओं को जीवंत किया।

एच.सी. गेरा, कमलेश गेरा, अनिमेष गोयल, मोहिनी सचदेवा, कर्नल एन.के. सिहाग और सरोज चोपड़ा सहित अनेक रचनाकारों ने प्रकृति, सावन, रिश्तों और जीवन मूल्यों पर आधारित कविताएं एवं भजन प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी।

संगीत सत्र में अभिलाष शर्मा ने माउथ ऑर्गन पर ‘ये शाम मस्तानी’ की मधुर धुन बजाई, जबकि बृज भूषण शर्मा, जसपाल सोढ़ा, राजीव सेठ, वलिंदर गुगनेजा, दविंदर सोढ़ी और वीना शर्मा ने गीत, ग़ज़ल और भजनों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियों में बी.एम. अग्रवाल, विजय सचदेवा, अनिता मेहदीरत्ता, निर्मल कालिया, शशि चड्ढा, जसविंदर कौर, राज धिंगड़ा, कर्नल आर.एस. भल्ला, सुशील चोपड़ा, आर.सी. शर्मा, ऊषा गर्ग, एन.के. शर्मा, चरणजीत सिंह और दीपा भल्ला ने अपनी रचनाओं और प्रस्तुति से दर्शकों को खूब हंसाया और भावुक भी किया।

कार्यक्रम के अंत में कार्यकारिणी सदस्य शशि चड्ढा ने सभी प्रतिभागियों और उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। गोष्ठी ने एक बार फिर यह साबित किया कि उम्र चाहे कोई भी हो, साहित्य और संगीत जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करते हैं।

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