वीवीआईपी पास होने के बावजूद प्रवेश से रोकने का आरोप, बेटे को गर्दन से पकड़कर पुलिस गाड़ी में बैठाने की कोशिश का दावा

पत्रकारों ने DCP अदिति सिंह को सौंपा शिकायत पत्र, मंत्री कृष्ण लाल पंवार की बैठक में भी उठी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

पंचकूला। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और पत्रकारों के सम्मान को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचकूला में दशहरे के अवसर पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम के दौरान पत्रकार हरपाल सिंह और उनके परिवार के साथ कथित बदसलूकी का मामला सामने आया है। इस मामले में सेक्टर-5 थाना प्रभारी संदीप कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों ने पंचकूला की डीसीपी अदिति सिंह को शिकायत पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वीवीआईपी पास होने के बावजूद प्रवेश से रोकने का आरोप

शिकायत में पत्रकार हरपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि वह 20 अक्टूबर को अपने परिवार के साथ पंचकूला में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। उनके पास वीवीआईपी पास होने के बावजूद उन्हें प्रवेश द्वार पर रोक दिया गया। हरपाल सिंह का आरोप है कि इसी दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को बिना पास प्रवेश दिलाया। इस कथित भेदभाव को लेकर सवाल उठने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

बेटे का वीडियो बनाना बना विवाद की वजह?

हरपाल सिंह के मुताबिक, जब उनका बेटा घटनाक्रम का वीडियो बना रहा था, तभी सेक्टर-5 थाना प्रभारी संदीप कुमार ने कथित तौर पर उसे गर्दन से पकड़कर पुलिस की गाड़ी में बैठाने का प्रयास किया। पत्रकार ने जब इसका कारण पूछा तो आरोप है कि थाना प्रभारी ने धमकी भरे लहजे में कहा कि उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया जाएगा, क्योंकि वह पुलिस की वीडियो बना रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना बाकी है।

DCP को शिकायत, पत्रकारों ने मांगा इंसाफ

घटना को लेकर पत्रकारों ने पंचकूला की डीसीपी अदिति सिंह को शिकायत पत्र सौंपा है। पत्रकारों ने मांग की है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

पत्रकारों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मियों से कानून के दायरे में रहकर काम करने की अपेक्षा की जाती है। किसी भी नागरिक या पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

मंत्री कृष्ण लाल पंवार की बैठक में भी उठा मामला

हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में आयोजित जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान भी पत्रकारों ने यह मामला उठाकर इंसाफ की मांग की। अब सवाल यह है कि बैठक में उठाए गए इस मामले पर संबंधित अधिकारी कितनी गंभीरता दिखाते हैं और शिकायत के आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है।

पत्रकारों के सम्मान और पुलिस की जवाबदेही का सवाल

यह मामला केवल एक पत्रकार की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, नागरिकों के अधिकारों और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई से भी जुड़ा है। पत्रकारों ने मांग की है कि मामले की जांच किसी ऐसे अधिकारी से करवाई जाए, जो आरोपों से सीधे तौर पर जुड़ा न हो, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।

अब निगाहें पंचकूला पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं। क्या पुलिस अधिकारी शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाकर उचित कार्रवाई करेंगे, या मामला केवल शिकायत तक सीमित रह जाएगा? यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और पुलिस प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।

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