चंडीगढ़। लोकतंत्र की मजबूती केवल समय पर चुनाव करवाने से नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और आम जनता के विश्वास को बनाए रखने से होती है। मतदाता सूची में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम दर्ज होना और उसे बिना किसी अनुचित बाधा के मतदान का अवसर मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। इसी मुद्दे को उठाते हुए ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मतदाता सूचियों में नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि देश में मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के मताधिकार से जुड़ी चिंताओं का समाधान तथ्यों तथा प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से मतदाता सूची से 13.50 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आयोग को बताना चाहिए कि संबंधित आंकड़ों का आधार क्या है, नाम हटाने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई और इस संबंध में आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े आंकड़े को लेकर यदि सार्वजनिक चर्चा हो रही है, तो आम नागरिकों की शंकाओं का समाधान करना आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने इस दावे की पुष्टि करने वाले आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए। ऐसे में उनका कहना है कि निर्वाचन आयोग को स्वयं तथ्य सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके और किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे।
मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा है लोकतंत्र पर जनता का भरोसा
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत जनता के विश्वास में निहित है। चुनाव प्रक्रिया तभी विश्वसनीय मानी जाती है, जब प्रत्येक पात्र नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का समान अवसर मिले। मतदाता सूची तैयार करने, उसका सत्यापन करने तथा उसमें नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और स्पष्ट मानकों के अनुसार होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन एक आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन इस दौरान यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से न हट जाए। यदि किसी नागरिक का नाम तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजों की कमी, जानकारी के अभाव या प्रक्रिया संबंधी कठिनाइयों के कारण सूची से बाहर हो जाता है, तो उसे अपनी पात्रता साबित करने और नाम दोबारा जुड़वाने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन से संबंधित नियमों को आम लोगों के लिए सरल भाषा में उपलब्ध कराया जाए। नागरिकों को यह जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए कि उनका नाम सूची में है या नहीं, नाम हटाए जाने की स्थिति में उसके कारणों का पता कैसे लगाया जा सकता है और सुधार के लिए किस अधिकारी या माध्यम से संपर्क करना होगा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और आयोग की जवाबदेही पर जोर
राजबीर सिंह भारतीय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा भारत निर्वाचन आयोग से अपील की कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने संबंधी दावों पर आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि जब किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनका जवाब तथ्यों, दस्तावेजों और प्रमाणिक आंकड़ों के माध्यम से दिया जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाता सूची को लेकर उठ रही शंकाओं के समाधान के लिए विस्तृत और स्पष्ट जानकारी आम नागरिकों तक किस प्रकार पहुंचाई जा रही है। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप से स्थिति स्पष्ट नहीं होती। इसके लिए संबंधित संस्था की ओर से आधिकारिक आंकड़े और प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण आधारशिला है। आयोग से जनता की अपेक्षा रहती है कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव या पक्षपात से अलग रहकर अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करे। जनता के सवालों का जवाब देना और चुनाव प्रक्रिया के प्रति विश्वास बनाए रखना भी इसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
युवाओं का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखना जरूरी
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि देश का युवा वर्ग लोकतंत्र के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर युवाओं की अपेक्षाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही व्यक्त होती हैं। मतदान नागरिकों को अपनी पसंद की सरकार चुनने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखने का अवसर देता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर युवाओं के मन में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता या अविश्वास पैदा होने से बचाना जरूरी है। इसके लिए निर्वाचन आयोग को पारदर्शी व्यवस्था अपनाने के साथ-साथ मतदाताओं को जागरूक करने और उनकी शिकायतों का समाधान करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल उठाने का अधिकार महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रक्रिया में कमियां सामने आने पर उनका समाधान संवाद, जांच और संवैधानिक माध्यमों से किया जाना चाहिए। इससे संस्थाओं की विश्वसनीयता मजबूत होती है और नागरिकों को अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है।
गरीबों, मजदूरों, किसानों और वंचित वर्गों के मताधिकार की सुरक्षा की मांग
ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा के चंडीगढ़ प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, छोटे दुकानदारों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की लोकतांत्रिक भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। इन वर्गों के लिए मतदान केवल सरकार चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था तक पहुंचाने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आजीविका जैसे मुद्दों पर जनता अपनी राय मतदान के माध्यम से व्यक्त करती है। इसलिए मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि को सामान्य प्रशासनिक गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रत्येक पात्र नागरिक को यह सुनिश्चित करने का अवसर मिलना चाहिए कि उसका नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें कमजोर आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नागरिकों को भी किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। जानकारी और शिकायत निवारण की व्यवस्था सरल होने से अधिक से अधिक पात्र नागरिक अपने मताधिकार की रक्षा कर सकेंगे।
महासभा ने निर्वाचन आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
राजबीर सिंह भारतीय ने ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश की ओर से भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को लेकर जनता के बीच मौजूद सवालों का समाधान करने के लिए आयोग को ठोस कदम उठाने चाहिए।
महासभा की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची से 13.50 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करना, संबंधित आंकड़ों और प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करना, नाम जोड़ने तथा हटाने के नियमों को पारदर्शी बनाना, गलत तरीके से नाम हटाए जाने की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करना और पात्र नागरिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा जुड़वाने का प्रभावी अवसर देना शामिल है।
इसके अलावा, महासभा ने मतदाता सूची के सत्यापन से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। राजबीर सिंह भारतीय के अनुसार, शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके समाधान तक की प्रक्रिया स्पष्ट और नागरिकों के लिए सुलभ होनी चाहिए। इससे मतदाताओं को अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक भटकना नहीं पड़ेगा।
संविधान और बाबा साहेब के विचारों का दिया हवाला
राजबीर सिंह भारतीय ने अपने वक्तव्य में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और संवैधानिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि समानता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार भारतीय संविधान की मूल भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक की आवाज का सम्मान होना चाहिए और मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मताधिकार नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देता है। इसलिए किसी भी पात्र व्यक्ति को अनुचित तरीके से इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। मतदाता सूची से जुड़े मामलों में यदि कोई गलती सामने आती है, तो उसका निष्पक्ष परीक्षण कर निर्धारित नियमों के अनुसार समाधान किया जाना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने स्पष्ट किया कि महासभा की मांग किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही, निष्पक्ष चुनाव और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा के उद्देश्य से है।
तथ्यों के आधार पर शंकाओं का समाधान हो
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य हैं। मतदाता सूची से जुड़े किसी भी दावे की वास्तविकता आधिकारिक आंकड़ों और दस्तावेजों के आधार पर सामने आनी चाहिए। इससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपील की कि वह जनता के सवालों का तथ्यात्मक जवाब देकर चुनाव प्रक्रिया में विश्वास को और मजबूत करे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती का वास्तविक आधार प्रत्येक पात्र नागरिक की भागीदारी है। इसलिए मतदाता सूची की शुद्धता, नाम जोड़ने और हटाने की पारदर्शी प्रक्रिया तथा शिकायतों का प्रभावी निवारण सुनिश्चित करना जरूरी है। मताधिकार की रक्षा ही लोकतंत्र की रक्षा है, और इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं को अपनी भूमिका पूरी निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ निभानी चाहिए।