बिजली बोर्ड कर्मचारी सोम कुमार की गला दबाकर की गई थी हत्या, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 50 हजार रुपये जुर्माने समेत सुनाई सजा

पंचकूला। करीब 11 वर्ष पुराने जमीनी विवाद से जुड़े हत्या के मामले में पंचकूला की अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी गुरनाम सिंह को दोषी करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंचकूला की अदालत ने गांव टिब्बी माजरा निवासी गुरनाम सिंह को 32 वर्षीय सोम कुमार की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अलग-अलग धाराओं में कारावास और जुर्माने की सजा भी निर्धारित की है। अदालत के आदेश के मुताबिक सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

मामला वर्ष 2015 का है और थाना रायपुर रानी क्षेत्र के गांव टिब्बी माजरा से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार सोम कुमार बिजली बोर्ड रायपुर रानी में कार्यरत था। जमीनी विवाद को लेकर हुए विवाद के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मृतक का शव 6 दिसंबर 2015 को रायपुर रानी स्थित अनाज मंडी के पीछे बरामद हुआ था। शव मिलने की सूचना के बाद रायपुर रानी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

अनाज मंडी के पीछे मिला था शव

पुलिस जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाते हुए केस को अदालत में पेश किया।

मामला अदालत में लंबे समय तक विचाराधीन रहा। पुलिस की ओर से मामले की प्रभावी पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखने के बाद आखिरकार करीब 11 वर्ष बाद इस मामले में फैसला आया।

गुरनाम सिंह को अदालत ने माना दोषी

9 सितंबर 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की अदालत ने मामले में आरोपी गुरनाम सिंह निवासी टिब्बी माजरा, रायपुर रानी, पंचकूला को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

इसके अलावा धारा 323/34 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माना, धारा 341/34 के तहत एक माह का साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माना तथा धारा 342/34 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, निर्धारित जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।

11 साल बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय

करीब एक दशक से अधिक समय तक चले इस मामले में अदालत के फैसले को पुलिस की प्रभावी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी को दोषी ठहराए जाने के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

पंचकूला पुलिस की ओर से कहा गया कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने के साथ-साथ अदालत में प्रभावी पैरवी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा दिलाई जा सके।

पुलिस कमिश्नर ने कहा- गंभीर अपराध में आरोपी कानून से बच नहीं सकेगा

पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन ने कहा कि पंचकूला पुलिस गंभीर अपराधों में निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच के साथ अदालत में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित कर रही है। उनका कहना है कि पुलिस का उद्देश्य है कि किसी भी गंभीर अपराध में शामिल आरोपी कानून की पकड़ से बच न सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 के इस हत्या मामले में अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा यह दर्शाती है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, पुलिस तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों के मामलों में जांच और अदालत की पैरवी को पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

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