महंगाई के दौर में 25 हजार रुपये न्यूनतम वेतन करने की मांग, कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर जताई चिंता
विशेष संवाददाता। सिख कौम के केंद्रीय धार्मिक एवं प्रबंधकीय संस्थानों के अधीन सेवा निभा रहे कर्मचारियों के वेतन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित विभिन्न गुरुद्वारा संस्थानों में सेवादारों, ग्रंथी सिंहों, रागी सिंहों, प्रचारकों तथा दफ्तरी कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। आरोप है कि कई कर्मचारियों को लंबे समय से करीब 8,500, 9,500, 10,000 अथवा 10-11 हजार रुपये प्रतिमाह के आसपास वेतन पर सेवा निभानी पड़ रही है।
महंगाई के मौजूदा दौर में इतने कम वेतन में किसी कर्मचारी के लिए अपने परिवार का सम्मानजनक ढंग से पालन-पोषण करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। घर का राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की फीस, किताबें, आने-जाने का खर्च, कपड़े, दवाइयां और अन्य आवश्यक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद इतनी कम आय में परिवार के भविष्य के लिए बचत करना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि धार्मिक संस्थानों में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा करने वाले कर्मचारियों को क्या ऐसा वेतन नहीं मिलना चाहिए, जिससे वे अपने परिवार का जीवन सम्मान के साथ चला सकें?
बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है सीधा असर
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा से जुड़ा हुआ है। किसी भी समाज और कौम की मजबूती उसकी आने वाली पीढ़ी की शिक्षा और योग्यता पर निर्भर करती है। यदि कम आय के कारण कर्मचारियों के बच्चे अच्छे स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं, तो इसका असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय में पूरी कौम की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए विद्यार्थियों को बेहतर स्कूलिंग के साथ कोचिंग, तकनीकी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षण संस्थानों की फीस जैसी अनेक जरूरतों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए इन खर्चों को वहन करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में यह सवाल भी सामने आता है कि यदि धार्मिक संस्थानों में सेवा करने वाले कर्मचारियों के बच्चे आर्थिक मजबूरियों के कारण उच्च शिक्षा से दूर रहेंगे, तो वे भविष्य में आईएएस, आईपीएस, न्यायिक सेवाओं, प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षण, चिकित्सा, तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आगे कैसे बढ़ पाएंगे?
कौम के भविष्य से जुड़ा विषय बताया
इस मुद्दे को केवल कर्मचारियों के वेतन का मामला न मानकर कौम के भविष्य से जुड़ा विषय बताया जा रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि जिस धार्मिक व्यवस्था को समाज, शिक्षा, सेवा और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देना है, उसके अपने कर्मचारियों का परिवार यदि आर्थिक कठिनाइयों से जूझता रहे तो इस विषय पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है।
गुरुद्वारा साहिबानों में सेवा करने वाले कर्मचारी धार्मिक संस्थाओं की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेवादारों से लेकर ग्रंथी, रागी, प्रचारक और कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में उनकी मेहनत, सेवा और जिम्मेदारी के अनुरूप सम्मानजनक वेतन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग को गंभीरता से देखे जाने की जरूरत बताई जा रही है।
कमेटियों के प्रधानों और प्रबंधकों से हस्तक्षेप की अपील
मांग उठाई गई है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान, अंतरिम कमेटियों तथा मुख्य प्रबंधकीय सदस्यों को इस विषय पर तत्काल विचार करना चाहिए। संबंधित कमेटियों द्वारा अपने अधीन आने वाले कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा कर मौजूदा महंगाई और परिवारों की आवश्यकताओं के अनुरूप न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की मांग की जा रही है।
प्रस्तावित मांग के अनुसार गुरुद्वारा कमेटियों के अधीन सेवा निभा रहे कर्मचारियों के लिए कम से कम 25,000 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय किया जाना चाहिए। साथ ही आवश्यकता के अनुसार वेतन में समय-समय पर महंगाई भत्ते और अन्य सुविधाओं को भी शामिल करने पर विचार किए जाने की मांग है।
सम्मानजनक वेतन से मजबूत होगा धार्मिक संस्थानों का आधार
मांग रखने वालों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों के कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन मिलने से न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि उनके बच्चों की शिक्षा का स्तर भी ऊपर उठेगा। आर्थिक सुरक्षा मिलने से कर्मचारी अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी सेवा और जिम्मेदारियों को निभा सकेंगे।
कौम के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। यदि कर्मचारियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं तो आने वाली पीढ़ी प्रशासन, न्यायपालिका, शिक्षा, चिकित्सा, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित कर सकती है।
ऐसे में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के सामने यह मामला केवल वेतन बढ़ाने का नहीं बल्कि अपने कर्मचारियों के सम्मान, उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और अगली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। कर्मचारियों और उनके परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपये करने की मांग पर गंभीरता से विचार किए जाने की अपील की गई है।