चंडीगढ़, अमर शर्मा। हरियाणा पुलिस की राज्य अपराध शाखा के अंतर्गत कार्यरत 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU) ने वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए 281 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया है। इनमें 57 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। यह सफलता हरियाणा पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली, आधुनिक तकनीक और प्रभावी समन्वय का उदाहरण मानी जा रही है।

पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने इस उपलब्धि पर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि हर गुमशुदा व्यक्ति के पीछे किसी परिवार की उम्मीद और पीड़ा जुड़ी होती है। ऐसे मामलों में हरियाणा पुलिस पूरी संवेदनशीलता, आधुनिक तकनीक और अंतरराज्यीय समन्वय के साथ लगातार काम कर रही है। उन्होंने दोहराया कि महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा मानव तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति आगे भी जारी रहेगी।

57 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित परिवारों तक पहुंचाया

जनवरी से जून 2026 के बीच बरामद किए गए 281 लोगों में 30 लड़के और 27 लड़कियां शामिल हैं, जिनकी आयु 18 वर्ष से कम थी। इन बच्चों की तलाश के लिए पुलिस ने विभिन्न राज्यों की पुलिस, बाल संरक्षण संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर विशेष अभियान चलाया। सभी बच्चों को सुरक्षित बरामद कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया।

224 वयस्क भी सुरक्षित बरामद

पुलिस ने 224 वयस्क गुमशुदा व्यक्तियों का भी सफलतापूर्वक पता लगाया, जिनमें 53 पुरुष और 171 महिलाएं शामिल हैं। इन मामलों में तकनीकी विश्लेषण, फील्ड इंटेलिजेंस और अंतरराज्यीय सहयोग का अहम योगदान रहा।

नेपाल तक चला सर्च ऑपरेशन

पुलिस महानिरीक्षक (राज्य अपराध शाखा) राकेश आर्या ने बताया कि खोज अभियान केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में सर्च ऑपरेशन चलाए गए और आवश्यकता पड़ने पर नेपाल तक समन्वय स्थापित कर गुमशुदा लोगों का पता लगाया गया।

7 साल बाद बेटी को परिवार से मिलाया

इस अभियान की सबसे भावुक सफलता वर्ष 2019 में लापता हुई एक नाबालिग बच्ची को उत्तर प्रदेश से सुरक्षित बरामद कर लगभग सात वर्ष बाद उसके परिवार से मिलाने की रही। यह दर्शाता है कि हरियाणा पुलिस किसी भी गुमशुदगी के मामले को समय बीतने के बावजूद बंद नहीं मानती और अंतिम व्यक्ति तक तलाश जारी रखती है।

आधुनिक तकनीक बनी सफलता की कुंजी

राज्य अपराध शाखा ने बताया कि डिजिटल विश्लेषण, तकनीकी निगरानी, रणनीतिक खुफिया जानकारी, स्थानीय पुलिस, अन्य राज्यों की पुलिस और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह सफलता संभव हुई। प्रत्येक मामले में उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग कर त्वरित कार्रवाई की गई।

हरियाणा पुलिस ने दोहराया कि मानव तस्करी और गुमशुदगी के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि हर गुमशुदा व्यक्ति को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया जा सके।

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